नमस्कार दोस्तों धर्म रहस्य चैनल पर आपका एक बार फिर से स्वागत है। मंजूषा की कहानी में अभी तक आपने जाना कि मंजूषा! उस खजाना दुल्हन को मुक्त कर देती है। अब मंजूषा जब महल पहुंचती है तो सैनिक उसे घेर लेते हैं। और? उस महल में। कन्या के चाचा और तांत्रिक दोनों मृत्युदंड की सजा मंजूषा और उस कन्या को देना चाहते हैं। सैनिक उन पर हमला करने ही वाले होते हैं कि तभी मंजूषा सैनिकों को संबोधित करती है। वह कहती है जीवन में मनुष्य स्वयं अपने कर्मों के लिए जिम्मेदार होता है। दूसरा कोई नहीं। वह सैनिकों से कहती है। क्या तुम्हारे इस पाप कर्म के लिए तुम्हारा राजा मृत्यु के बाद ईश्वर के समक्ष? खुद की गलती को मानेगा और तुम्हारे पाप! का जो भी दंड है वह स्वयं अपने लिए स्वीकार करेगा। सैनिक एक दूसरे को देखने लगते हैं। मंजूषा कहती है सुनो! तुम अगर यह गलत कर्म करोगे जिसमें? मैं निर्दोष हूं। यह कन्या भी पूर्ण निर्दोष है। फिर हम दोनों की हत्या तुम लोग कैसे कर सकते हो? यह तो महा पाप होगा। और इस पाप की वजह से तुम लोगों की कभी मुक्ति नहीं होगी। यह राजा जिसके चंद सोने के सिक्कों के लिए तुम यह कार्य करने वाले हो, यह तुम्हें नर्क गामी बना देगा। खून से भरे हुए सोने के सिक्के केवल नरक की ओर ले जाते हैं। तुम्हारे इस कर्म के लिए तुम स्वयं जिम्मेदार होंगे। तुम्हारा राजा नहीं! वह तो केवल आदेश दे रहा है किंतु आदेश सही है या गलत यह तो तुम्हें ही? पता है। सैनिक शांत हो जाते हैं। पीछे से? कन्या का चाचा जोर से चिल्लाते हुए कहता है तुम सबको मैं। अपनी नौकरी से निकाल दूंगा। अगर तुमने तुरंत ही इस? मंजूषा और इस कन्या को जान से नहीं मारा तो? सैनिक! अपने शस्त्र फिर से उठाते हैं लेकिन मंजूषा फिर कहती है। क्या तुम अपनी इस बात के लिए स्वयं उत्तरदाई होने को तैयार हो? कि तुमने एक निर्दोष स्त्री और कन्या का वध किया था। अब इन बातों से प्रभावित होकर के वह! कहने लगती है कि? तुम्हारी इन सब चीजों का कोई प्रभाव हम पर नहीं पड़ेगा लेकिन मैं सिर्फ तुम्हें। आगाह कर रही हूं क्योंकि? बाप तो बाप होता है। मेरे पास इतनी शक्तियां है कि तुम लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे, किंतु ऐसा कर्म करके नर्क गामी क्यों होते हो? सैनिकों को समझ में आ चुका था। सभी सैनिक वही शांत खड़े हो गए। अब! उस कन्या के चाचा ने उस तांत्रिक से कहा, सैनिक तो बेवकूफ हो गए हैं। इस पर इस स्त्री ने वशीकरण कर दिया है। इसलिए अब तुम ही तुरंत इस कन्या और स्त्री का वध करो। अपनी सबसे बड़ी शक्ति का प्रयोग करो! तब? वह! तांत्रिक अपनी सबसे बड़ी शक्ति नागा का आवाहन करता है नागा आकर। सभी ओर फूँकार मारने लगता है बहुत तेजी से कन्या और। मंजूषा की ओर आने लगता है। उसके मार्ग में खड़े सैनिकों को भी वह उठाकर इधर-उधर फेंक देता है क्योंकि उसके सामने पड़ने वाली हर चीज वह समाप्त कर देना चाहता था। मंजूषा उस पर अपनी शक्तियों का प्रयोग करती है। उसे बांध देती है लेकिन सर्प उस! रस्सी को भी तोड़ देता है। उस पर कई तरह की शक्तियों का प्रयोग करने के बाद भी नागा नहीं रुकता है और तेजी से इनकी ओर हमला करता है। तब आखिरकार मंजूषा को। नागा से लड़ने लायक महाशक्ति का आवाहन करना पड़ता है अपने मंत्र! और माता की शक्ति को याद करते हुए वह गरुड़ा वीर का आवाहन करती है। गरुड़ा वीर वहां तुरंत ही उड़ते हुए आ जाता है। गरुड़ा वीर और नागा में भयंकर युद्ध होने लगता है। उस! नागा। नाम के शक्तिशाली सर्प ने अपनी शक्तियों का प्रयोग जारी रखा वह चारों ओर तेजी से दौड़ता। इधर वह गरुड़ा वीर भी सर्प के पीछे-पीछे इधर-उधर उड़ता हुआ जाता। दोनों एक दूसरे पर शक्तियों का प्रयोग कर रहे थे। नागा अपनी फ़ूकार से विष ग्रंथि से विष का प्रयोग कर रहा था। वहां खड़े सारे सैनिक बेहोश हो चुके थे। लेकिन? वहां पर खड़ी मंजूषा और वह कन्या अभी तक सुरक्षित थे। फिर अचानक से! वह नागा गोपनीय तरीके से तेजी से। उस कन्या के पास पहुंच जाता है और उसे डस लेता है। कन्या वहीं गिर जाती है। मंजूषा। अपनी शक्तियों का प्रयोग करती है और कन्या को कवच में ले लेती है किंतु कन्या का इलाज जल्दी होना आवश्यक था। इधर गरुड़ा इधर उधर उसे पकड़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नागा की शक्ति के आगे गरुड़ा कुछ भी नहीं कर पा रहा था। आखिरकार मंजूषा को माता को याद करना पड़ता है। अपने गुरु मंत्र की शक्ति से वह नाग देवी को याद करती है और नाग देवी! गरुड़ा के शरीर में प्रवेश कर जाती हैं। इससे गरुड़ा कई गुना अधिक शक्तिशाली हो जाता है। अब गरुड़ा तेजी से नाग के ऊपर हमला करने लगता है। दोनों का युद्ध अब पहले से कहीं अधिक भयंकर हो चुका था। नागा इधर उधर भाग रहा था क्योंकि वह अब गरुड़ा की शक्ति का मुकाबला नहीं कर पा रहा था। नागा जब उस पर विष की फ़ूकार मारता तो गरुड़ा उसे आराम से पचा जाता। क्योंकि गरुड़ा के अंदर नाग देवी की शक्तियां आ चुकी थी। लड़ते-लड़ते सुबह से शाम हो गई, किंतु वह युद्ध समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा था। किंतु जैसे जैसे समय बीत रहा था, नागा की शक्तियां कमजोर पड़ती जा रही थी। धीरे-धीरे नागा शिथिल होने लगा और अचानक से एक स्थान पर रुक गया। अब गरुड़ा और नागा का युद्ध सीधा सीधा होने लगा। कुछ देर बाद गरुड़ा ने उसे पकड़ लिया और वहीं पर मार दिया। उसे मारकर गरुड़ा। उसे खा गया। इस प्रकार गरुड़ा की शक्ति के कारण नागा समाप्त हो चुका था। गरुड़ा पर अब तांत्रिक ने अपनी तांत्रिक शक्तियों का प्रयोग शुरु कर दिया। गरुड़ा उस और बढ़ता ही चला गया। और आखिरकार उसने तांत्रिक को पकड़ लिया। तांत्रिक पर अपनी चोचो से इतना? वार किया कि आखिर कार तांत्रिक भी मारा गया। उसके चाचा ने गरुड़ा पर पीछे से वार किया और! तेजी से हमला किया। लेकिन गरुड़ा ने अब उसके चाचा को उठा लिया और आकाश में लेकर गया। उसके बाद उसने उसे वहीं से नीचे छोड़ दिया। आखिरकार चाचा नीचे गिरा और शरीर फट जाने से उसकी वहीं पर मृत्यु हो गई। अब कन्या जोकि नागा के कारण बेहोश हो गई थी। उसके पास आकर गरुड़ा ने उसका सारा जहर खींच लिया। इसी के साथ नागदेवी गरुड़ा के शरीर से बाहर निकल आई और उन्होंने सारा जहर स्वयं को ग्रहण कर वहां से अदृश्य हो गए। कन्या को होश आ चुका था। कन्या ने देवी मंजूषा के सामने। उनके चरण पकड़ लिए और कहा आप सच में एक देवी हैं जो पृथ्वी पर मानव रूप में उपस्थित है। आपने ना सिर्फ उस तांत्रिक को मार दिया और मेरे चाचा का भी वध कर किया। मंजूषा ने कहा, ठीक है मेरा तो कार्य ही जनसेवा है। दुष्टो को दंड देना मेरा कार्य है और सज्जनों की रक्षा करना भी, मैं अब सदा के लिए तुम्हारी! संरक्षिका बनती हूं। मंजूषा ने उस कन्या को राज्य सौंप दिया और इस प्रकार मंजूषा अपने आश्रम एक बार फिर से लौट आई। और इस प्रकार यह खजाना कन्या को ही प्राप्त हो गया इस प्रकार! यह कथा यहीं पर समाप्त होती है। अगर आज का वीडियो आपको पसंद आया है तो लाइक करें। शेयर करें, सब्सक्राइब करें। आपका दिन मंगलमय हो। धन्यवाद। तांत्रिक भैरवी मंजूषा साधना सीखना भाग 18
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तांत्रिक भैरवी मंजूषा साधना सीखना भाग 17
Dharam Rahasya
MPDRST( मां पराशक्ति धर्म रहस्य सेवा ट्रस्ट) -छुपे रहस्यों को उजागर करता है लेकिन इन्हें विज्ञान की कसौटी पर कसना भी जरूरी है हमारा देश विविध धर्मो की जन्म और कर्म स्थली है वैबसाइट का प्रयास होगा रहस्यों का उद्घाटन करना और उसमे सत्य के अंश को प्रगट करना l इसमें हम तंत्र ,विज्ञान, खोजें,मानव की क्षमता,गोपनीय शक्तियों इत्यादि का पता लगायेंगे l मै स्वयं भी प्राचीन इतिहास विषय में PH.D (J.R.F रिसर्च स्कॉलर) हूँ इसलिए प्राचीन रहस्यों का उद्घाटन करना मेरी हॉबी भी है l आप लोग भी अपने अनुभव जो दूसरी दुनिया से सम्बन्ध दिखाते हो भेजें और यहाँ पर साझा करें अपने अनुभवों को प्रकाशित करवाने के लिए धर्म रहस्य को संबोधित और कहीं भी अन्य इसे प्रकाशित नही करवाया गया है date के साथ अवश्य लिखकर ईमेल - [email protected] पर भेजे आशा है ये पोस्ट आपको पसंद आयेंगे l पसंद आने पर ,शेयर और सब्सक्राइब जरूर करें l धन्यवाद