
नमस्कार दोस्तों धर्म रहस्य चैनल पर आपका एक बार फिर से स्वागत है आज एक बार फिर से कहानी को आगे बढ़ाते हैं भद्रा देवी की स्वर्ण मूर्ति की कथा भाग 1 में आपने जाना कि किस प्रकार से सोनभद्र में एक जिला है जहां पर सोनगिरी गुफा है एक पहाड़ जहां पर एक तांत्रिक जिनका नाम था नहुषा और उनके थे गुरु राज देव दोनों ने कोशिश की थी कि वह बहुत अधिक संपत्ति साली हो इसके लिए उन्होंने कोशिश है कि और इसके लिए उन्होंने भद्रा देवी की उपासना चालू की
भद्रा देवी की उपासना करने के बाद उन्होंने कोशिश करते करते नहुसा ने देखा कि एक राक्षस उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा है और भद्र देव की जो उन्होंने प्रतिमा बनाई थी वह स्थापित नहीं होने दे रहा है इसकी वजह से वह बहुत ही ज्यादा कोशिश करते रहते हैं ओम भद्राय नमः का जाप भी करते हैं फिर भी उसकी मूर्ति बार-बार टूट जा रही थी और वहां पर राक्षस प्रकट हो जा रहा था उसने मूर्ति तोड़ने की कोशिश की लेकिन भगवान शिव की उपासना की वजह से वह राक्षस ऐसा नहीं कर पाया अब आगे जानते हैं क्या हुआ नहुषा बहुत ही ज्यादा परेशान हो गया
क्योंकि उसके सिर के ऊपर चोट की गई थी सिर से खून निकल रहा था दर्द के मारे वह बौखला गया और उसने उस राक्षस को ललकारा लेकिन राक्षस केवल इस कार्य को करने का ध्यान दे रहा था कि उसे किस प्रकार से उस मूर्ति को तोड़ना है लेकिन मूर्ति तोड़ने इतना आसान नहीं था क्योंकि भगवान शिव की उपासना शक्ति उस वक्त वहां पर जुड़ गई थी राक्षस वह नहीं कर पाया परेशान होकर के आखिर कार डर के मारे नहुषा को उस क्षेत्र को छोड़ना पड़ा
और वह अपने गुरु के पास गया उसने सारी बात अपने गुरु को बताई गुरु ने कहा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है अगर वह तुम्हारी मूर्ति नहीं तोड़ पाया तो तुम्हारे तब को भी नहीं तोड़ पाता लेकिन क्योंकि ऐसी समस्या हो चुकी है इसलिए तुम तैयार हो जाओ और तुम्हें आगे भी बहुत कुछ करना होगा भगवान शिव के मंत्रों के कारण वह उत्पन्न हो गया है और वह इस क्षेत्र में रहता होगा रक्षा सुरक्षा के लिए चलो मैं तुम्हें एक गोपनीय मार्ग बताता हूं
तुम देवी श्मशान काली की उपासना करो उनकी उपासना तुम्हें करनी होगी उनको अगर तुम्हें प्रसन्न कर लिया तो यह राक्षसी शक्तियां तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी इस बात को समझते हुए आखिरकार एक बार फिर से उसने कोशिश की और वह श्मशान काली की उपासना करने के लिए वहां पर उपस्थित एक श्मशान में जा कर के उपासना करने लगा उसने देखा कि किस प्रकार से देवी श्मशान काली आखिरकार उससे प्रसन्न हो गई देवी श्मशान काली के प्रसन्न हो जाने पर वह एक बार प्रकट हो गई और देवी ने उससे कहा बता तेरी इच्छा क्या है इस प्रकार जब इच्छा उसने व्यक्त की कहां कि मैं रक्षा चाहता हूं
माता इस पर मां ने कहा अवश्य ही मैं तेरी रक्षा करूंगी तू जा भद्र देव की उपासना कर मेरे नाम का सुरक्षा कवच और मंत्र तू अपने चारों ओर लगा लेना मैं भी देखती हूं संसार में ऐसी कौन सी शक्ति है जो मेरे रक्षा कवच को भेद सकें इस प्रकार से पूजा संपन्न कर जब वह उस स्थान पर जाकर भद्र देव की उपासना करने लगा और वह ओम भद्राय नमः मंत्र का उच्चारण करने लगा तो वहां पर कई सारी असुर शक्तियां उत्पन्न हो गई सारी की सारी असुर शक्तियों ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन वह उसके नजदीक तक नहीं पहुंच पा रही थी
और इस प्रकार उसने भद्र देव की पूजा तपस्या उस दिन की संपन्न की अगली रात को भी वह इसी प्रकार से भद्र देवता की उपासना करता रहा आखिरकार वह दिन नजदीक आ गया जब उसने साक्षात भद्र को अपने सामने पाया भद्र देवता साक्षात उसके सामने प्रकट होकर के कहने लगे कि तू अब अपनी सिद्धि को प्राप्त कर चुका है बता तेरी क्या इच्छा है मैं अवश्य ही उसे पूर्ण करूंगा तो नहुषा ने कहा हे प्रभु आप मुझे ऐसी शक्ति दीजिए कि मैं यहां पर एक नजदीक ही एक गांव है वहां पर जाकर के उस नीलमणि को निकाल सकूं और आपकी कृपा से भद्रा देवी को भी भविष्य में प्रसन्न कर सकूं यह बात सुनकर भद्र देव प्रसन्न हो गए और उन्होंने कहा अवश्य ही मैं तुझे वर देता हूं तू अपने सभी कार्यों में सफल रहेगा बस यह याद रखना कि लालच में ना फंसना क्योंकि लालच बुरी बला है और वह तुम्हें अपने कार्य से हटा देगी तुम्हें भ्रमित कर देगी
इसलिए अब तुम तैयारी करो और तुम्हें कोई भी रोक नहीं पाएगा क्योंकि मेरी शक्ति साक्षात तुम्हारे विद्यमान रहेगी इस प्रकार आज्ञा प्राप्त करके वह बहुत ही प्रसन्न था वह यह सब कुछ देख पा रहा था जान पा रहा था कि उसके शरीर में क्या क्या घटित हो रहा है लेकिन समय की परिस्थितियों के हिसाब से और वह अपने गुरु के पास गया और उनसे कहने लगा की हे गुरुदेव अब मुझे आज्ञा प्रदान कीजिए और उस नागमणि को प्राप्त करने की विद्या बताइए वह कहने लगे कि रात्रि के समय ठीक 12:00 बजे सर्वथा नग्न होकर के उस दिशा की ओर जाना वहां पर तुम पहुंच करके अपनी शक्ति का प्रयोग करना भद्र देव के मंत्रों का उच्चारण करते हुए
और जो भी तुम्हें दिखे उस पर ध्यान नहीं देना है और जब वह मणि चमकने लगे तो उसके पास जाकर के उसे चूमना है उसके बाद भद्रा देवी को याद करना है उस मणि को उठा लेना है कोई भी तुम्हें दिखाई दे या कोई भी तुम्हें भ्रमित करने के लिए कोशिश करें तो तुम बिल्कुल भी घबराना नहीं यह सब कुछ जो भी होगा वह माया होगी और माया मैं तुम्हें किसी भी प्रकार से फसना नहीं है अपने गुरु से आज्ञा प्राप्त करके नहुषा उस और जाने की तैयारी करने लगा उसने रात्रि को स्नान किया और पूर्णता नग्न होकर के उस दिशा की ओर चलने लगा अभी वह उस गांव में पहुंचा ही था तभी उधर से कई सारी स्त्रियां मशाल चलाते हुए गुजरने लगी नहुषा ने जब स्त्रियों को देखा तो घबरा गया उसे लगा कि उसे नग्न अवस्था में बहुत सारी स्त्रियां देख लेंगी
इसलिए वह झाड़ियों में छिप गया और वह घबराया हुआ था लेकिन यह क्या नहुषा जहां छुपा था उसके पास ही वह स्त्रियां उसी मार्ग पर आकर के जमीन पर बैठ गई और उन्होंने मशालों को वहीं पर स्थापित कर दिया नहुषा छुप छुप के वहीं पर बैठा उन्हें देखने लगा वह सरमाया और घबराया हुआ था क्योंकि उस गांव में प्रवेश करने का एक वही माध्यम था केवल वही एक रास्ता था जिसके कारण वह उस गांव में प्रवेश कर सकता था बाकी ओर से जाने में उसे बहुत समय लग जाता इसलिए वह करता तो क्या करता गुरु की आज्ञा भी थी
कि अवश्य ही इस कार्य को संपन्न कर लेना है वह भ्रम में पड़ गया सोचने लगा अब क्या करूं यह तो बड़ी ही स्थिति खराब हो चुकी है अब मैं क्या करूं किस प्रकार से इस मुसीबत का सामना करूं यहां पर तो बहुत सारी स्त्रियां बैठी है और अगर मैं उनके सामने नग्न अवस्था में गया तो मेरी क्या इज्जत रह जाएगी मैं किस प्रकार से इनका सामना करूं सोचने विचारने लगा इसी प्रकार से एक बाहर निकल गया पर उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह चुपचाप उन्हें छुप कर देख रहा था स्त्रियां वहां से हटने का नाम नहीं ले रही थी घबराने की वजह से वह श्मशान काली को याद करने लगा और उन्हें पुकारने लगा हे माता श्मशान काली आप मेरी मदद कीजिए कोई मार्ग बताइए
जिससे मैं इस बाधा से मुक्ति प्राप्त कर सकूं मुझे बहुत अधिक शर्म आ रही है तभी वहां पर एक स्त्री प्रकट होकर के उनके पीछे आकर खड़ी हो जाती है वह काफी विशालकाय थी जैसे ही यह उन्हें देखता है आश्चर्य में पड़ जाता है और अपने शरीर के अंगों को ढकने की कोशिश करने लगता है वह मुस्कुराते हुए कहती हैं जगत में सारे के सारे नग्न होकर ही पैदा होते हैं मेरा सारा स्वरूप ही नग्न है फिर भी मेरा पुत्र होते हुए भी तू इतना अधिक घबरा रहा है अभी तो तूने मेरी उपासना ही की थी तूने कोशिश की थी मुझे प्रसन्न करने की इसके बाद भी तू रहस्य को समझ नहीं पाया और केवल एक छोटी सी बाधा से घबराया हुआ यहां अकेला बैठा हुआ है
उसकी बात को समझते हुए नहुषा ने फिर से उन्हें प्रणाम किया और वह समझ गया कि यह कोई और नहीं है यह माता श्मशान काली ही है माता श्मशान कालिका को प्रणाम करते कहने लगा कि माता मुझे बहुत अधिक शर्म आ रही है इन स्त्रियों के सामने मैं कैसे जाऊं मैं पूरी तरह से नग्न हूं और मैं इस रास्ते से गुजरे बिना उस मणि तक नहीं पहुंच सकता माता कहने लगी कि तू पूरी तरह से मूर्ख है सोच यहां पर कोई है ही नहीं अगर तू फिर भी शर्म करता है तो ठीक है मैं तेरे साथ चलती हूं और मैंने कहा ठीक है तू मेरा हाथ पकड़ ले और फिर उसने उनका हाथ पकड़ लिया शर्म के मारे बेहाल हुआ पसीने से तरबतर वह उनके साथ चलने लगा
मां उसके हाथ को कस के पकड़े हुए थे वह शर्म लिहाज से उनके साथ चलता हुआ उस और मार्ग से जा रहा था जहां पर बहुत सारी जवान स्त्री या बैठी हुई थी सभी इनकी और देख करके मुस्कुराने लगी और कहने लगी धन्य हो धन्य हो और इस तरह से वह मार्ग पार कर गया जब वह मार्ग पार कर गया तो वह पूछने लगा हे माता आपने साक्षात आकर मेरी यहां मदद की है पर मैं यह नहीं समझ पाया कि स्त्रियों ने आखिर धन्य हो धन्य हो क्यों कहा है इसके पीछे क्या राज है आखिर क्या रहस्य है माता क्यों उन सब ने आपको प्रणाम किया और सब ने यह कोशिश की आपको बधाई देते हुए धन्य हो धन्य हो कहने लगी माता कहने लगी मैंने शायद तुझे पता नहीं है
तेरा रूप एक छोटे से बालक का बना दिया था और तुझे मैं अपने हाथ से पकड़ कर के चल रही थी इसी कारण से जब स्त्रियों ने तुझे देखा तो वह सब के सब यह देख कहने लगी कि रात्रि के समय एक माता अपने बालक को नग्न अवस्था में ले कर के जा रही है यहां तेरी परीक्षा थी क्योंकि इस मणि को प्राप्त करने के लिए जो जैसी अवस्था में चलता है उसी अवस्था में जाना पड़ता है परीक्षा तूने पास कर ली है क्योंकि मैं तेरे साथ थी मैंने तुझे छोटे बालक का रूप दे दिया था यह तुझे पता भी नहीं चला और अबोधबालक को देख कर के सब के सब धन्य हो धन्य हो कहने लगी क्योंकि मैं साक्षात तेरे साथ चल रही थी अब समझा नहुषा की आंखों में आंसू आ गए
उन्होंने माता को प्रणाम करते हुए कहा हे माता श्मशान काली मैं धन्य हुआ आपने मुझे अपना पुत्र बना लिया है और मुझे इस प्रकार से रक्षा की मैं आपको पूर्णता धन्यवाद करता हूं आपकी सिद्धि कर लेने पर मनुष्य के लिए कुछ भी असंभव नहीं रह जाता वह कुछ भी प्राप्त कर सकता है मैं यह बात जानता हूं माता की सिद्धि का विधान अद्भुत है यही सोचते हुए उसने माता को प्रणाम किया और उनके चरण छुए और माता अदृश्य हो गई उसके बाद वह आगे बढ़ने लगा तभी वहां पर एक डंडा लिए हुए पुरुष सामने खड़ा हुआ दिखाई दिया जो बहुत ही गुस्से से इनकी और देख रहा था और वह जोर से चिल्लाने लगा और कहने लगा तू यहां सोना लेने आया है
यह पूरा क्षेत्र स्वर्णमई है यहां सोना है यहां धरती के बीच सोना निवास करता है जिस पर्वत से तू आ रहा है वह सोन पर्वत है उसके अंदर सोना भरा हुआ है तू सारा सोना लेने के लिए यहां पर आया है और उस मणि के माध्यम से सोने को प्राप्त करना चाहता है पर तू ऐसा नहीं कर पाएगा और वह गुस्से से इनकी और दौड़ने लगा आगे क्या हुआ हम लोग जानेंगे अगले भाग में मां श्मशान काली की साधना के संबंध में जो विधान है उसके लिए मैं लिंक और पीडीएफ नीचे दिया हुआ है अगर कोई उसे लेना चाहे और इस विद्या को प्राप्त करना चाहे तो वह लिंक पर प्राप्त कर सकता है तो आपको यह जानकारी और कहानी पसंद आ रही है तो लाइक करें शेयर करें सब्सक्राइब करें आपका दिन मंगलमय हो धन्यवाद
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भद्रा देवी की स्वर्ण मूर्ति भाग 3