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साधकों के प्रश्न और उत्तर बहुत जरूरी जानकारी 84

साधकों के प्रश्न और उत्तर बहुत जरूरी जानकारी 84

सात्विक, राजसिक और तामसिक इन तीनों साधनाओं में से कोन सी साधना जल्दी सिद्ध होती है और क्यों?

उत्तर :-  साधना तीन तरह की होती है | जब पूरी तरह से शुद्धता का पालन किया जाता है, भोजन से लेकर कर अपने आचार विचार में शुद्धता होती है तो उसको हम सात्विक साधना कहते है | जब इक्षा के वशीभूत होकर कोई साधना सम्पन की जाती है तो वह राजसिक साधना के श्रेणी में आती है, जहा इक्षा प्रदान होती है | तामसिक साधनाओ में इक्षा इतनी अधिक प्रबल होती है की हम दूसरे के नुकसान के बारे में भी नहीं सोचते है, अपनी हित की ही पूर्ति करना ही मुख्य उद्देश्य रह जाता है और इसी प्रकार की साधना क्रम को तामसिक साधना कहा जाता है |  जहां अधिकतर इतर योनिया या शमशान में मांस मदिरा आदि के प्रयोग के द्वारा सिद्ध किया जाता है |

तीनो में साधनाओ को अगर हम कलयुग में ले तो सबसे जल्दी सफलता तामसिक साधनाओ में प्राप्त होती है | यह प्रकृति का नियम की जो शक्ति जितनी उग्र और प्रचंड होती है उनको वस में लाना उतना ही सरल होता है अगर सही तरीके से साधना सम्पन करते है तो लेकिन ये साधनाए क्षणिक होती है, अधिक समय तक साथ नहीं देती है | तामसिक साधनाओ में अगर आपसे थोड़ी गलती भी हो गई तो  साधना समाप्त हो जाती है |

राजसिक साधना की बात करे तो इन साधनाओं में नियम टूट जाते है | इन साधनाओ में आप किसी प्रकार का भोज्य पदार्थ ग्रहण कर सकते है, इन साधनाओं में  जो साधना  नियम होते है उनमे अगर किसी प्रकार की गलती भी हो जाती है तो भी किसी प्रकार की  समस्या  नहीं आती वो मान्य होती है | इस प्रकार की साधना साधारण लोगे के लिए अति उत्तम होती है | तामसिक साधनाओ से हमें उच्च लोको की प्राप्ति नहीं हो पाती है लेकिन राजसिक साधनाओ में ऐसा नहीं नहीं है |

सात्विक साधनाओ में  नियम अति महत्वपूर्ण होती है | सात्विक साधनाओ में आपको मन, कर्म, वचन से और हर प्रकार से आंतरिक रूप से शुद्ध होना पड़ता  है | सात्विक साधनाओ को सिद्ध करने के लिए लम्बा समय लग जाता है इसलिए धैर्य बनाए रखना भी जरुरी होता है, जहा तामसिक साधना कुछ ही दिनों में सिद्ध हो जाती है वही सात्विक साधनाओ में कई वर्षो तक का समय भी लग जाता है इसलिए लोग सात्विक साधना लम्बे समय तक नहीं कर पाते है  | सात्विक साधनाओ का प्रभाव ये है की मृत्यु से पहले भी और मृत्यु के बाद दोनों ही रूपों में ये साधना आपके साथ चलती है इसका प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता है, पुरे जीवन में उस साधक कोकिसी प्रकार की  दरिद्रता नहीं देखनी पड़ती, जीवन में किसी प्रकार का अभाव नहीं रह जाता और इस प्रकार की साधना स्वर्ग लोक से भी ऊंचे लोको में ले जाने की समर्थ रखती है और पूर्ण मोक्ष देने में भी सक्षम होती है |

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